न जाने कब खर्च हो गये , पता ही न चला....!
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वो लम्हे ,
जो छुपाकर रखे थे "जीने के लिए”...!!
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लोग समझते हैं कि मैं तुम्हारे हुस्न पर मरता हूँ,
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Kitna Aur Dard Dega
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ए-खुदा उसके हर एक लम्हे की हिफाज़त करना,
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लोग पूछते है ये कविताएँ कैसे बनी ?
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क्यूँ ना सज़ा मिलती मुझे इश्क़ में, . .
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True lines ::
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तुम भी करके देखलो मौहबत समझ जाओगे
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रात आती है किसी की याद में कट जाती है
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